गांव की प्यासी घोड़ींयाँ - पार्ट २
गाँव की घोंड़ीयां और चुदाई - पार्ट २ मीना अपने कदमो को, ख़ेत के बने पगडंडीयों पर तेजी से बढ़ाते हुए अपने घर की तरफ़ चली जा रही थी| उसके दीमाग में सीर्फ कल रात घटी घटना ही घूम रही थी| वो चलते-चलते कुछ सोचने लगती है... ‟ हाय राम! मैं ये क्या कर रही हूँ? अपने ही बेटे को इतना छुट दे रही हूँ की, वो अपनी मां की बुर को ही सहला रहा था| कीतनी गंदी हूं मै! लेकिन क्या करुँ? बल्लू इतने प्यार से सहला रहा था कि, मैं तो इक दम खो सी गयी और उसे रोक भी नही पायी| लेकीन अब ये सब ठीक नही है, मुझे बल्लू को कैसे भी कर के समझाना चाहिए| लेकिन वो बेचारा भी क्या करे? वो भी तो जवान हो गया है, उसका मन भी तो करता होगा ये सब करने का...| हे भगवान! कीस दुवीधा में फंस गयी मै? मुझे तो कुछ समझ में ही नही आ रहा है...? ” ❏❏❏❏❏❏ ‟ अरे...भौजी कहां इतनी तेजी से चली जा रही हो? ” इस अनज़ानी आवाज़ ने, मीना को उसकी सोच की दुनीया से नीकालते हुए, ज़मीन पर ला दीया| और मीना के कदम जो अभी तेजी से पगडंडीयों पर चल रहे थे, वो अचानक रुक गये| मीना ने नज़र घुमा कर ...