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Showing posts from April, 2022

लड़ाई प्यार की - (भाग २)

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अब आगे... रात के ११ बज रहे थे। मगर हवेली के एक कमरे में अभी भी लाईट जल रही थी। और वो कमरा था आनंदी का। जो अपने आलीशान कमरे के गद्देदार बेड पर बैठी थी। वो ख़ामोश और मायुस बैठी अपनी आँखें भरे। एकटक अपने बेटे की तस्वीर देखती रहती है। वो अजय की तस्वीर देखती-देखती कुछ सोंच की दुनीयां में चली जाती है... "आ..आ...आ...माँ ना मारो, लग रहा है।" अजय रोते हुए छटपटा कर इधर-उधर भागते हुए बोला। मगर आनंदी तो उसे हरे लतेदार डंडे से पीटते ही जा रही थी। "लग रहा है नालायक, आँ...बोल! जब देखो तब मेरे पीछे ही जासूसी करता रहता है। मुझे बदनाम करता है, अपनी माँ को! मेरा खा कर मुझे ही धौंस दीखाता है, बीत्ते भर का है और बाते बड़ी-बड़ी।" आनंदी बोलते हुए अजय को पीटे जा रही थी। और बेचारा अज़य रोते हुए छटपटाता रहता है। सवीता और रागीनी आगे बढ़ कर आनंदी को पकड़ कर रोकने लगती है। मगर आनंदी उन्हे भी झटक देती है। और गुस्से में बोली- आनंदी: "सुक्खे...!" तभी सुक्खे दौड़कर आता है। सुक्खे: "जी...मालकीन!" आनंदी: "ले जा इसे कोठरी में बंद कर दे। और जब तक मैं ना कहूँ, इसे ...

लड़ाई प्यार की?

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लड़ाई प्यार की? लड़ाई प्यार की? (A sensual love story) काली अंधेरी रात ने धरती पर चादर ओढ़ ली थी। आसमान में टीमटीमाते तारेँ भी काले घने बादल की गोद में छीप गये। हवाँवों ने अपना रुख़ बदला तो, तेज़ आँधीयों में तब्दील हो गई। फीर बीज़ली भी कहाँ पीछे हटने वाली थी। वो भी कड़कने लगी॥ और बीज़ली के कड़कते ही, बादलों ने वर्षा शुरु की। आसमान से बारीश की पहली बूंद जैसे ही नीचे धरती पर गीरने को हुई। वों बूंद एक ८ साल के मासूम बच्चे के उपर गीरी॥ बूंद का अहेसास होते ही, वो बच्चा आसमान की तरफ़ देखने लगा। उसकी आँखों से बह रहे आँशूओं को, आसमान से बरसते बादल की मोटी बूंदे भी उसके आँसुओं से मील गये। मानो जैसे आज वो मासूम बच्चा नही, बादल रो रहा हो। ८ साल का मासूम बच्चा, इतनी कड़कती तेज बीज़ली, बादलों की तेज़ गरज़, और आँधीयों के तेज़ झोके से भी ना डरा, वो बस वही खड़ा दूर एक बड़ी हवेली की तरफ़ देखता रहा। उसकी आँखों में बेबसी और लाचारी साफ दीखाई दे रही थी। वो भीगते हुए एक-टक उस हवेली की तरफ मायूसीयत से देखता रहा। और फीर उसके मुह से एक आवाज़ नीकली... "जा रहा हूँ माँ...!" और फीर वो ८ साल का बच्चा, अपने ...