Vidhawa Padosan Aur Garam Maa Ki Chaudi Gaand Hot Story

Vidhawa Padosan aur garam maa ki chaudi gaand in saree


Basanti Maa ka Garam Ehsas: Part 1

Namskaar दोस्तो, कहानी शुरू करते है। मेरे घर में, मैं राहुल (२०) साल । मेरी बसंती मां (४५ साल), मेरे बापू (४६ साल) और मेरी बड़ी बहन पूनम (२२ साल) इतने लोग है।

मेरे बापू की तबियत ठीक नहीं रहती है, तो घर की सारी ज़िम्मेदारी मेरे कंधों पर ही है। १२th पास करने के बाद, मै दिल्ली कमाने आ गया। मेरे फूफा जी एक कपड़े की फैक्ट्री में काम करते थे, तो मुझे भी उन्होंने काम पर लगा दिया।

खैर अब घर की हालत, थोड़ी ठीक हुई थी, अब घर में कमाने वाला मै जो था। १ साल खाने के बाद, मै कुछ दिन की छुट्टी लेकर घर जाने वाला हो था। जब घर पहुंचा, तो अपनी बसंती मां के पैर छुए, बापू के भी पैर छुए, फॉर खाना पीना खाकर बस उस दिन आराम किया।

रात को खाना पीना खाकर जब सब सोने के लिए बिस्तर पर गए। तो एक कमरे में मै और मेरी मां सोते थे, और बाहर बरामदे में , बापू सोते थे। बहन की शादी हो गई थी, तो वो अपने ससुराल थी।

अमेरी और मेरी मां की खाट, अगल बगल में ही थी। मै और मां दोनों बाते करने लगे। मां शहर के बारे में पूछने लगी कि, मेरा मन लगता था या नहीं, खाना पीना समय पर खाता था या नहीं, वही सब बाते जोनल मां अपने बेटे से करती है।

यूं ही बात बातों में, मां ने कहा...

"आज कल के बच्चे तो बच्चे, अब तो बूढ़े भी पगला गए है। ना जाने का होगा इस दुनिया का?"

मुझे मां की बाते कुछ समझ नहीं आई, मैने कहा - "का मतलब अम्मा? किसकी बात कर रही है तू?" मां मुस्कुराते हुए अपनी चादर अपने ऊपर और गले तक खींचती हुई बोली - "किसकी बात कर रही हूं, मतलब का? तुझे पता नहीं का? ऊ माला के बारे में?"

... (बीच का हिस्सा) ...

मेरी आँखों के ठीक सामने उसकी चौड़ी गांड का वो भारी उभार अपनी पूरी गहराई के साथ तन गया। रात को चादर के नीचे जो गांड चपटी लग रही थी, इस समय साड़ी के कसते ही वो किसी पके हुए मांसल फल की तरह फटने को बेताब दिख रही थी।

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