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गांव की प्यासी घोड़ींयाँ - पार्ट २

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गाँव की घोंड़ीयां और चुदाई - पार्ट २ मीना अपने कदमो को, ख़ेत के बने पगडंडीयों पर तेजी से बढ़ाते हुए अपने घर की तरफ़ चली जा रही थी| उसके दीमाग में सीर्फ कल रात घटी घटना ही घूम रही थी| वो चलते-चलते कुछ सोचने लगती है... ‟ हाय राम! मैं ये क्या कर रही हूँ? अपने ही बेटे को इतना छुट दे रही हूँ की, वो अपनी मां की बुर को ही सहला रहा था| कीतनी गंदी हूं मै! लेकिन क्या करुँ? बल्लू इतने प्यार से सहला रहा था कि, मैं तो इक दम खो सी गयी और उसे रोक भी नही पायी| लेकीन अब ये सब ठीक नही है, मुझे बल्लू को कैसे भी कर के समझाना चाहिए| लेकिन वो बेचारा भी क्या करे? वो भी तो जवान हो गया है, उसका मन भी तो करता होगा ये सब करने का...| हे भगवान! कीस दुवीधा में फंस गयी मै? मुझे तो कुछ समझ में ही नही आ रहा है...? ” ❏❏❏❏❏❏ ‟ अरे...भौजी कहां इतनी तेजी से चली जा रही हो? ” इस अनज़ानी आवाज़ ने, मीना को उसकी सोच की दुनीया से नीकालते हुए, ज़मीन पर ला दीया| और मीना के कदम जो अभी तेजी से पगडंडीयों पर चल रहे थे, वो अचानक रुक गये| मीना ने नज़र घुमा कर ...

गाँव की प्यासी घोड़ीँयां - (village sex story)

लंड की प्यासी गांव की घोड़ीँयां हैलो दोस्तो, मै सुधीया वर्मा इस साईट की नयी लेख़िका| ये मेरी पहली कहानी है. "गाँव की प्यासी घोंड़ीयां" जो एक कामुक गाथा है| इस कहानी में आप पढ़ेगें की, कैसे गाव की प्यासी औरते अपने तन की प्यास बुझाती है? यद्यपी ये कहानी गंदी बातों और गाँव की चुदाई से भरी हुई एक कामुक रासलीला है| जीसमें आपको माँ-बेटे की चुदाई, बहन-भाई की चुदाई, परीवार में चुदाई, नाज़ायज संबध आदी सब आधारित एक काल्पनीक गाथा है| जीसे मैने अपनी सेक्स डायरी से नीकल कर आप सब के सामने पेश कीया है| इस कहानी का कीसी भी वास्तवीकता से कोई संबध नही है, संबध होना मात्र एक संयोग वश होगा| इस कहानी में जो भी संबध आप सब के सामने प्रस्तुत होगें; यक़ीनन उस संबध को हमारे समाज़ में मान्यता नही है| अत: नीवेदन है, की जीस कीसी भी हमारे पाठक को ऐसी कहानी पसंद ना हो, क्रपया वो इस कहानी को ना पढ़े| और पढ़ने मे दीलचस्पी रखने वाले पाठक एंव पाठीका का दील से स्वागत है..| आशा करती हूँ की मेरी लेख़नी से लीख़ी ये कहानी, हमारे पाठकों के लंड से और पाठीकाओं की चूत को आनंद पहुचानें में कारगार हो। पसंद आये तो कहानी के...

कम्मो दुधवाली और गांव...पार्ट4(कामुक-उपन्यास)

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कम्मो दुधवाली और गांव पार्ट - 4 संरपच, अवधेश ठाकुर की हवेली के सामने एक ज़ीप आकर खड़ी हुई!! और उसी ज़ीप में से कीसी हॉर्न बज़ायी.. रामू दौड़ते हुए गेट तक पहुचां और गेट को खोलते हुए देखा की, ये ज़ीप तो पुलीस की थी| रामू इससे पहले की कुछ बोल पाता, पुलीस की ज़ीप आगे बढ़ी और हवेली में प्रवेश कर गयी... "पुलीस के ज़ीप के पीछे ही, दीनेश की ज़ीप भी हवेली में प्रवेश की...| दीनेश ने ज़ीप को एक तरफ़ खड़ी करते हुए उस पर से नीचे उतरा और रामू से पूछा- दीनेश- क्या बात है रामू...ये पुलीस की गाड़ी यहां क्यूं आयी है?? दीनेश की बात सुनकर, रामू ने कहा- रामू- पता नही..छोटे मालीक!! दीनेश...ने अपने कदम हवेली के अदंर जाने की तरफ़ बढ़ा दीया.. हवेली के प्रवेश द्वार के दहलीज़ को पार करते हुए थानेदार के कदम सभागृह(हॉल) में पड़ा! सरपंच कुर्सी पर बैठकर चाय की चुस्कीया ले रहा था| सरपंच की नज़र थानेदार पर जैसे ही पड़ी,उसने चाय का कप एक तरफ़ रख दीया| थानेदार के साथ दो हवलदार थे...थानेदार सरपंच के सामने आकर खड़ा होते हुए बोला- नमस्कार....सरपंच जी!! मेरा नाम प्रताप है...और में इस गांव का नया दरोगा हूं| सरपं...

कम्मो दुधवाली और गांव...पार्ट3 (कामुक-उपन्यास)

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दो चुदक्कड़ हरामख़ोर CLICK TO READ कम्मो दुधवाली और गांव पार्ट-3 कल्लू...अपने घर के आंगन में खाट पर बैठा था| उसके ज़हन में अभी भी उसके मां की वो कामुक बाते चल रही थी| तभी उसकी मां सरला आगन में आ गयी, उसके हाथो में जुठे बर्तन थे..शायद वो उसे धोने के लीये आयी थी| सरला, बर्तनो को नीचे रखते हुए कल्लू की तरफ देखते हुए बोली- सरला- कल्लू...बेटा, जा..जाके कुवें पर से एक बाल्टी पानी तो लेते आ, मुझे बर्तन धोना है| अपनी मां की बाते सुनकर...कल्लू खाट पर से उठते हुए, पास में पड़ी बाल्टी लेते हुए आँगन से बाहर नीकल जाता है... कल्लू, जैसे ही कुएं पर पहुचतां है...उसने देखा की कमला उसकी चाची भी कुएं पर पानी भर रही थी| कल्लृ भी कुएं पर पहुचं कर बाल्टी रख कर खड़ा हो जाता है...तभी कमला की नज़र उस पर पड़ जाती है| कमला- अरे...कल्लू, कल तू मुझसे नाराज़ होकर क्यूं चला गया?? कल्लू , अपने चाची की बात सुनते हुए थोड़ा नाराज़ होकर बोला- कल्लू- चाची तू मुझसे बात मत कर...मुझे तुझसे कुछ भी बात नही करनी है!! कल्लू की बात सुनकर...कमला पानी की बाल्टी को रस्सीयो से खीचती हुई ब...

कम्मो दुधवाली और गांव पार्ट-2 (कामुक-उपन्यास)

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नमस्कार दोस्तो "HINDI ME SEX STORIES" में आपका स्वागत है| आशा करता हु आप सबको"कम्मो दुधवाली और गांव पार्ट-1" जरुर पसंद आयी होगी| तो ,इसीलीये एक बार फीर से आप सबके लीये, मैं हाज़ीर हूं लेकर "कम्मो दुधवाली और गांव पार्ट-2" "कम्मो दुधवाली और गांव " पार्ट - 2 कल्लू अपनी मां के पीछे-पीछे चल रहा था| उसकी नज़र...उसकी मां के मोटे और चौड़ी गांड पर थी, जो चलते समय कभी इधर तो कभी उधर ठुमक रहे थे| उसे उसकी मां की गांड उत्तेजीत कर रही थी| और उसके ज़हन में सीर्फ एक सवाल घर कर के बैठी थी की, आखीर मां साडं वाली इतनी गंदी बात कैसे कर सकती है? और वो चंदू को देखकर ही ये बात क्यू बोल रही थी? कही मां और चंदू....??...नही..नही...मां ऐसी नही है| मैने आज तक उनके बारे में कुछ गलत नही सुना...लेकीन फीर मां ऐसी बाते वो भी चंदू को देखकर....क्यूं?? कल्लू अपने मन में ही , अपनी मां के चरीत्रो का सवाल खड़ा कर लीया था और वो कीसी भी प्रक्रार के नीर्णय पर नही पहुचं पा रहा था| तो उसने ख़ुद से ये नीर्णय लीया की, वो कुछ दीनो के लीये अपनी मां पर नज़र रखेगा| चंदू घर से बा...

कम्मो दुधवाली और गांव.....पार्ट1 (कामुक-उपन्यास)

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"गांव की दुधवाली" कल्लू अरे वो कल्लू कहां है तू?? तेरी अम्मा बुला रही है| कल्लू खेत का पंपूसेट ठीक करते हुए , खेत मे बने झोपड़े से बाहर नीकला कल्लू- का हुआ चाची, काहे चील्ला रही हो? कल्लू की चाची कमला एक 38 साल की बेहद खुबसुरत औरत है। बील्कुल ऐसी दीखती है... तस्वीर देखकर आपने आदाँजा तो लगा ही लीया होगा की कमला की जवानी कीतनी मस्त और खुबसुरत है?? कमला- अरे मै कहा चील्ला रही हूं? मै तो बता रही हूं की तेरी अम्मा बुला रही है| कल्लू- अरे चाची आ रही थी तो, लेते आती....यहीं खा लेता| कमला- अगर घर पर जा कर खा लेगा तो क्या हो जायेगा? कल्लू- होगा तो कुछ नही चाची, लेकीन तू नही रहेगी ना वंहा। और तेरे बीना खाना गले के नीचे नही उतरता!! "कल्लू की बात सुनकर, कमला बोली| कमला- अच्छा, बहुत प्यार दीखा रहा है अपनी चाची पर , जब तेरी औरत आ जायेगी ना तो अपनी चाची को भूलकर दीन भर उसके पीछे ही भागेगा!! कल्लू- अरे चाची क्या बोल रही है तू? तू इतनी खुबसुरत है की, तूझे कोयी भूल ही नही सकता | तेरी खुबसुरती के आगे तो आज-कल की लड़कीया कुछ नही है...