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गाँव की प्यासी घोड़ीयां - भाग 5 (chudakkad ghodiya)

गाँव की मस्त घोड़ीयां - भाग ५ लेख़ीका : मीना शर्मा गन्ताक से आगे: शीला की आंखे, उस आदमी के लंड को देखकर फटी जा रही थी| मुट्ठीयों में पकड़ी हुई उस मोटे लंड का सपर्ष पाकर, उसकी बुर की फांके अब खुलने लगी थी... "ऐसे का देख रही हो शीला? सीर्फ मेरा ही देखोगी की अपना भी दीखाओगी?" शीला का चेहरा लगातार शर्म से लाल होते जा रहा था| लेकीन ऐसे शानदार लंड को अपने से दूर भी नही रख सकती थी| इसलीये शीला ने शर्म का चोला हटाने में ही भलाई समझी। और एक बार उस आदमी की तरफ देखते हुए मुस्कुरायी, और फीर वहीं खेतों में ही ज़मीन पर लेट गयी...और साड़ी को उपर सकेलते हुए, अपनी टांगे चौंड़ी कर दी| शीला की बीना झांटो वाली चीकनी बुर को देखकर, उस आदमी की आँखो में चमक आ गयी! और उसका लंड शीला की आंखो के सामने ही झटके पर झटके मारने लगा... उसके लंड को झटके पर झटके मारते देख, शीला अपनी टांगे चौड़ी कीये; शरमा कर बोली- शीला-"भाई साहब...! लगता है, आपका ये मोटा डंडा बहुत उतावला हो रहा है" शीला की बात सुनते हुए, वो आदमी भी नीचे बैठते हुए; शीला के उपर लेट गया| उसका लंड शीला की पनीया चूकी चीकनी बुर ...

pyasi chut ki jamkar chudai

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chut ki chudai, chut chudai, kunwari ladki ki chudai chut ki chudai प्रेषिका: रीया, हैलो फ्रेंड्स, इस कहानी में आप पढ़ेंगे की, कैसै मेरी चूत चुदाई - chut chudai हुई, मेरी बुर की चुदाई - bur ki chudai हुई| कीस तरह एक कुवांरी लड़की की चूदाई kunwari ladki ki chudai हुई | तो बीना समय को वेस्ट कीये चले चलते हैं सीधा स्टोरी पर... chut ki chudai दोस्तो मेरा नाम रीया है। मैं उत्तर-प्रदेश के कानपुर शहर की रहने वाली हूँ! अभी मेरी उम्र 39 साल की है! लेकीन ये कहानीं तब की हैं जब मैं 19 साल की थी| उसी उम्र में मेरी पहली बार चूत की चूदाई हुई; उसके बाद से तो मुझे चूत चूदाई का चस्का ही लग गया| उस दीन मेरे घर पर, मेरे दीदी की शादी थी| मेरे घर पर बहुत मेहमान आये हुए थे| उन्ही मेहमानो में एक थे, मेरे फूफा जी| मेरे फूफा जी दीखने में काफ़ी हट्टे-कट्टे थे| अक्सर वो जब कभी भी हमारे घर पर आते थे, तो मुझे बहुत घूर-घूर कर देखते थे| और ये बात मैने नोटीस भी की थी, मगर कभी भी उतनी तवज्जो नही दी थी| शादी वाले दीन, सब लोग काम में बीज़ी थे| मैं अपने रुम में अपनी कुछ सहेलीयो के साथ बैठी बाते कर रही थ...

गाँव की प्यासी घोड़ीयाँ - भाग ४ (hindi gaonv me chudai )

गाँव की प्यासी घोड़ीयां - (gaon ki pyasi ghodiya) भाग - ४ लेख़ीका- मीना शर्मा उस रात मीना की आंखों में नींद, दूर-दूर तक नही थी| घर के छत पर लेटी मीना, अपनी साड़ी को खींचते हुए पेट तक चढ़ा ली थी| वो नीचे से पूरी तरह नंगी थी| रात के अंधेरे में, बगल में लेटी उसकी बेटी फूलवा को भी भनक नही लगी की, उसकी मां अपने बेटे से खुद की बुर सहलावाने के लीये; साड़ी कमर तक चढ़ा कर लेटी है| दूसरी तरफ़ लेटा बल्लू की, हालत कुछ ऐसी ही थी| वो भी आज अपनी माँ की बुर को जी भर कर सहलाना चाहता था| और मीना भी तो यही चाहती थी| इसी-लीए तो उसने अपनी साड़ी को पहले से ही चढ़ा ली थी| बल्लू का लंड झटके पे झटके मार रहा था| उसने अपने सूख गये होठो पर, जीभ फीराते हुए; अपने होंठो को गीला कीया और धीरे-धीरे अपना हाथ उठाते हुए; मीना के पेट पर रख देता है| बल्लू का हांथ अपने पेट पर अहसास करते ही, मीना की सांसे बढ़ने लगी| अब बल्लू धीरे-धीरे मीना के पेट को सहलाने लगा... मीना का बदन गरम होने लगा था| बल्लू ने अपना हांथ पेट पर सहलाते हुए उपर की तरफ़ ले जाते हुए, अपनी माँ के पील्लूओ पर रख देता है| बल्लू का तो जैसे हालत ही खराब हो गया, इतनी...

गाँव की प्यासी घोंड़ीयाँ - भाग ३ (village sex story)

गाँव की प्यासी घोड़ीयां - भाग ३ गन्ताक से आगे: ये सुनकर, मीना थोड़ा मुस्कुरायी और बोली- मीना-" झूठ...काहे बोल रहा है? दीन-रात सुधीया की कुटायी कर तो रहा है, और वो भी मेरा नाम लेके|" मीना की बात सुनकर, जुबेर ने मीना के हांथो को पकड़ते हुए बोला- जुबेर-" लेकीन तू नही दे रही है ना भौजी! इसी बात का गम है| सुधीया की कुटायी तो तेरा नाम ले कर इस लीये करता हूँ की, मैं उस वक्त सोंचने लगता हूँ की, तोहरी बुर कीतनी प्यारी होगी भौजी?" जुबेर-"कीतनी कसी और फूली होगी! ये सोचकर ही पगला जाता हूँ|" जुबेर के मुह से ऐसी बात सुनकर, मीना शरम से लाल हो जाती है...और धीरे से बोली- मीना-"इतना काहे सोचता है? मन है तो देख ले मेरी बुर|" ये बोलकर, मीना मारे शरम के अपना सर नीचे झूका लेती है| और इधर जुबेर को तो जैसे अपने कानो पर भरोसा ही नही हुआ... जुबेर-"हाय रे भौजी...!सच मे| इतना काहे तड़पा रही थी फीर, पहले काहे नाही दीखा दी?" मीना जुबेर की तरफ़ देखते हुए मुस्कुराकर बोली- मीना-"पहले तूने कभी बोला ही नही! तो कैसे दीखाती? मैने तूझे सीर्फ कुटायी करने के ...

गांव की प्यासी घोड़ींयाँ - पार्ट २

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गाँव की घोंड़ीयां और चुदाई - पार्ट २ मीना अपने कदमो को, ख़ेत के बने पगडंडीयों पर तेजी से बढ़ाते हुए अपने घर की तरफ़ चली जा रही थी| उसके दीमाग में सीर्फ कल रात घटी घटना ही घूम रही थी| वो चलते-चलते कुछ सोचने लगती है... ‟ हाय राम! मैं ये क्या कर रही हूँ? अपने ही बेटे को इतना छुट दे रही हूँ की, वो अपनी मां की बुर को ही सहला रहा था| कीतनी गंदी हूं मै! लेकिन क्या करुँ? बल्लू इतने प्यार से सहला रहा था कि, मैं तो इक दम खो सी गयी और उसे रोक भी नही पायी| लेकीन अब ये सब ठीक नही है, मुझे बल्लू को कैसे भी कर के समझाना चाहिए| लेकिन वो बेचारा भी क्या करे? वो भी तो जवान हो गया है, उसका मन भी तो करता होगा ये सब करने का...| हे भगवान! कीस दुवीधा में फंस गयी मै? मुझे तो कुछ समझ में ही नही आ रहा है...? ” ❏❏❏❏❏❏ ‟ अरे...भौजी कहां इतनी तेजी से चली जा रही हो? ” इस अनज़ानी आवाज़ ने, मीना को उसकी सोच की दुनीया से नीकालते हुए, ज़मीन पर ला दीया| और मीना के कदम जो अभी तेजी से पगडंडीयों पर चल रहे थे, वो अचानक रुक गये| मीना ने नज़र घुमा कर ...

गाँव की प्यासी घोड़ीँयां - (village sex story)

लंड की प्यासी गांव की घोड़ीँयां हैलो दोस्तो, मै सुधीया वर्मा इस साईट की नयी लेख़िका| ये मेरी पहली कहानी है. "गाँव की प्यासी घोंड़ीयां" जो एक कामुक गाथा है| इस कहानी में आप पढ़ेगें की, कैसे गाव की प्यासी औरते अपने तन की प्यास बुझाती है? यद्यपी ये कहानी गंदी बातों और गाँव की चुदाई से भरी हुई एक कामुक रासलीला है| जीसमें आपको माँ-बेटे की चुदाई, बहन-भाई की चुदाई, परीवार में चुदाई, नाज़ायज संबध आदी सब आधारित एक काल्पनीक गाथा है| जीसे मैने अपनी सेक्स डायरी से नीकल कर आप सब के सामने पेश कीया है| इस कहानी का कीसी भी वास्तवीकता से कोई संबध नही है, संबध होना मात्र एक संयोग वश होगा| इस कहानी में जो भी संबध आप सब के सामने प्रस्तुत होगें; यक़ीनन उस संबध को हमारे समाज़ में मान्यता नही है| अत: नीवेदन है, की जीस कीसी भी हमारे पाठक को ऐसी कहानी पसंद ना हो, क्रपया वो इस कहानी को ना पढ़े| और पढ़ने मे दीलचस्पी रखने वाले पाठक एंव पाठीका का दील से स्वागत है..| आशा करती हूँ की मेरी लेख़नी से लीख़ी ये कहानी, हमारे पाठकों के लंड से और पाठीकाओं की चूत को आनंद पहुचानें में कारगार हो। पसंद आये तो कहानी के...

कम्मो दुधवाली और गांव...पार्ट4(कामुक-उपन्यास)

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कम्मो दुधवाली और गांव पार्ट - 4 संरपच, अवधेश ठाकुर की हवेली के सामने एक ज़ीप आकर खड़ी हुई!! और उसी ज़ीप में से कीसी हॉर्न बज़ायी.. रामू दौड़ते हुए गेट तक पहुचां और गेट को खोलते हुए देखा की, ये ज़ीप तो पुलीस की थी| रामू इससे पहले की कुछ बोल पाता, पुलीस की ज़ीप आगे बढ़ी और हवेली में प्रवेश कर गयी... "पुलीस के ज़ीप के पीछे ही, दीनेश की ज़ीप भी हवेली में प्रवेश की...| दीनेश ने ज़ीप को एक तरफ़ खड़ी करते हुए उस पर से नीचे उतरा और रामू से पूछा- दीनेश- क्या बात है रामू...ये पुलीस की गाड़ी यहां क्यूं आयी है?? दीनेश की बात सुनकर, रामू ने कहा- रामू- पता नही..छोटे मालीक!! दीनेश...ने अपने कदम हवेली के अदंर जाने की तरफ़ बढ़ा दीया.. हवेली के प्रवेश द्वार के दहलीज़ को पार करते हुए थानेदार के कदम सभागृह(हॉल) में पड़ा! सरपंच कुर्सी पर बैठकर चाय की चुस्कीया ले रहा था| सरपंच की नज़र थानेदार पर जैसे ही पड़ी,उसने चाय का कप एक तरफ़ रख दीया| थानेदार के साथ दो हवलदार थे...थानेदार सरपंच के सामने आकर खड़ा होते हुए बोला- नमस्कार....सरपंच जी!! मेरा नाम प्रताप है...और में इस गांव का नया दरोगा हूं| सरपं...